क्या ग़ालिब के शेरों में आए ये लफ़्ज़ आपको भी मुश्किल में डालते हैं?

अच्छी शायरी का मुआमला ज़रा अलग क़िस्म का होता है, इसमें लफ़्ज़ों के परे एक ऐसी दुनिया होती है कि अगर आप उस तक पहुंचने से असमर्थ रहे तो शायरी के असल आनंद से वंचित रहेंगे।