Tag : Meer

Hazrat-e-Ishq, हज़रत-ए-इश्क़

हज़रत-ए-इश्क़, जो उस्तादों के उस्ताद हैं

ज़िन्दगी बदलाव का नाम है, जड़ चीज़ों को निष्प्राण कहा जाता है। लेकिन बदलाव कई तरह का होता है, बच्चा पैदा होने के बाद बुज़ुर्ग होने तक बहुत से बदलावों से गुज़रता है, इन बदलावों की दिशा कुछ भी हो सकती है और अगर कोई राह दिखाने वाला न हो तो अक्सर दिशा उल्टी ही… continue reading

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Aashiqi Mein Meer Jaise Khwaab Mat Dekha Karo

It is said that Meer used to go wild at the sight of the moon, as he had an illusion that the face of his separated beloved was reflected in the moon.

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