Articles By Vivek Pratap Singh

Dagh Dehlvi

दिन में ग़ज़ल कहते और रात तक तवायफ़ों / क़व्वालों के ज़रिये मशहूर हो जाती

नवाब मिर्ज़ा ख़ान दाग़ की पैदाइश 25 मई 1831 को दिल्ली के लाल चौक में हुई, उनके वालिद शहीद शमसुद्दीन अहमद पंजाब में एक छोटी सी रियासत फ़िरोज़पुर झिरका के वली थे। इनकी वालिदा वज़ीर ख़ानम उर्फ़ छोटी बेगम थीं। दाग़ जब मात्र चार वर्ष के थे तभी इनके वालिद को एक अंग्रेज़ी सिविल सर्वेंट अधिकारी विलियम फ़्रेज़र के क़त्ल के जुर्म में 8 अक्टूबर 1835 को फाॅंसी दे दी गई ,उसके बाद इनकी वालिदा का रो रो कर बुरा हाल हो गया था और वो अंग्रेज़ों के भय से कई दिनों तक छुपकर रहीं।

जो कृष्ण भक्त थे और मौलवी भी थे, और कामरेड भी

हसरत शायर तो थे ही ,संविधान सभा के सदस्य भी थे, जो यूनाइटेड प्रोविंस से चुने गए थे ,इस्लामी विद्वान,फ़लसफ़ी और कृष्ण-भक्त इनके बारे में कहा जाता है। हसरत जब भी हज की यात्रा करके लौटते थे तो सीधे मथुरा वृंदावन जाया करते थे। वो कहते थे जब तक मैं मथुरा न जाऊॅं मेरा हज किस काम का है उनके बारे में मशहूर है कि उन्होंने तेरह हज किए थे।

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