Archives : October 2020

Lafzon par nigrani rakkho

लफ़्ज़ों पर निगरानी रक्खो

हमारी आम ज़बान में ख़ासतौर से दो लफ़्ज़ ‘ग़लती’ और ‘हरकत’ बहुत मक़बूल और राइज हैं पर शाएरी के हवाले से देखें तो इनका इस्तेमाल हम ग़लत तरीक़े से कर सकते हैं क्यों कि हम इन दोनों ही अल्फ़ाज़ के अस्ल तलफ़्फ़ुज़ से वाक़िफ़ नहीं हैं।

Qissa Kahani Dagh Dehlvi ki Shagufta Mizaji

#QissaKahani: जब दाग़ बोले, “मियाँ बशीर आप शेर कहते नहीं, शेर जनते हैं”

‘क़िस्सा कहानी’ रेख़्ता ब्लॉग की नई सीरीज़ है, जिसमें हम आप तक हर हफ़्ते उर्दू शायरों और अदीबों के जीवन और उनकी रचनाओं से जुड़े दिलचस्प क़िस्से लेकर हाज़िर होंगे। इस सीरीज़ की पहली पेशकश में पढ़िए दाग़ देहलवी की शगुफ़्ता-मिज़ाजी का एक दिलचस्प क़िस्सा।

Lafzon ke matrook hone ki kahani

لفظوں کے متروک ہونے کی کہانی

اب دالان اور صحن کی جگہ لابی نے لے لی ہے جہاں بیٹھ کر نہ آپ آسمان دیکھ سکتے ہیں اور نہ موسم گرما کی راتوں میں تاروں کی چھاؤں میں چارپائی بچھاکر سو سکتے ہیں، نہ سردیوں میں دھوپ سینک سکتے ہیں اور نہ برسات میں بارش کا مزہ لے سکتے ہیں۔

Image Shayari, Tasweer shayari

तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है

शायर जलील मानिकपूरी साहब अपनी महबूबा की तस्वीर देखते हुए कहते हैं कि इस तस्वीर में हर अदा अच्छी है, सिवाए इस बात के कि तस्वीर में महबूबा ख़ामोश है। अब ये सभी को पता है कि अपनी तस्वीर में कोई भी शख्स ख़ामोश ही रहेगा, लेकिन फिर भी शायर का बयान लुत्फ़ देता है।

Sir Syed Ahmad Khan and Mirza Ghalib

सर सय्यद और ग़ालिब के बीच की नाराज़गी, जो किताब से शुरू हुई और बोतल पर ख़त्म हुई

सर सय्यद और ग़ालिब के रिश्ते उस किताब से ख़राब हुए थे जिसे सर सय्यद ने सम्पादित किया था और ग़ालिब ने उस किताब के लिए सर सय्यद की ख़ूब आलोचना की थी। लेकिन इसके बाद एक समय वो आया जब दोनों के बीच की दूरियाँ शराब की एक बोतल पर समाप्त हुईं।

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