Archives : February 2021

Metaphor in Urdu

रूपक जो शेर को ज़मीन से आसमान तक पहुँचा देते हैं

माशूक़ा के चेहरे या बदन की ख़ूब-सूरती बयान करने लिए चाँद, माह, माह से बना माह-पारा/ मह-पारा, माह-जबीं, गुल, गुल से बना गुल-बदन, गुल- फ़िशाँ, गुलाब, पंखुड़ी वग़ैरा। माशूक़ा के लिए ‘बुत’ लफ़्ज़ इस्तिआरे के तौर पर बे-इन्तेहा राइज है।

Talat Mahmood

तलत महमूद: जिसने ग़ज़ल गायकी को आसान बना दिया

तलत महमूद को शहंशाह-ए-ग़ज़ल भी कहा जाता है। उन्होंने ग़ज़ल गायकी को आसान बनाया। उन्होंने लफ़्ज़ों को इतनी नरमी दे दी कि मानो जैसे वो फूल हों। मीर, मोमिन, ग़ालिब, जिगर मुरादाबादी, अमीर मीनाई, ख़ुमार बाराबंकवी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, जाँ निसार अख़्तर जैसे बड़े शाइरों की ग़ज़लों को अपनी आवाज़ से छू कर उनकी ख़ूबसूरती में इज़ाफ़ा किया।

Josh Malihabadi

Ishqnaama: The love-life of Josh Malihabadi

An emotionally honest Josh has remained an icon of love with a difference. In this extraordinary narrative Yaadon ki Baraat spread over 729 pages, he has narrated his love-life in 57 pages and unabashedly claimed that he loved “not once but eighteen times”.

Meer-Aur-Mohsin-Naqvi

जन्नत में शायरों की एक महफ़िल

मैंने सुना है मेरे बाद कोई लफ़्ज़ों का ऐसा साहिर पैदा हुआ है , जिसे इश्क़ ने निकम्मा कर रखा था और ज़माने ने पागल क़रार दे रखा था, कोई ग़ालिब गुज़रा था , क्या था वो शख़्स? उस के बारे में मैं पहले ही कह दिया था कि उस्ताद मिला तो ठीक वर्ना मोहमल बकेगा।

एक ऐसा परिवार जो छ पीढ़ियों से साहित्य की ख़िदमत कर रहा है

उर्दू अदब के चंद बेहतरीन और अहम शाइरों की फ़ेहरिस्त में जाँ निसार अख़्तर का नाम भी आता है। अपनी बात को आसान लहजे में कह देने का फ़न उन की शाइरी में भी देखने को मिलता है। वो अपने वक़्त से लेकर अब तक लोगों के पसंदीदा शाइर बने हुए हैं जब कि ऐसा कम शाइरों के साथ होता है। उनकी शाइरी को पसंद करने वाले लोगों में दिन-ब-दिन इज़ाफ़ा हो रहा है।

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