Tag : Abhishek Shukla

10 साल, 10 शायर

उर्दू के वसीअ दामन में पली-बढ़ी मुख़्लिफ़ असनाफ़-ए-सुख़न में ग़ज़ल के हिस्से में जो मक़बूलियत आई उतनी शोहरत और मक़बूलियत शायरी की किसी सिन्फ़ को न मिल सकी। ग़ज़ल हर दौर में अपने पढ़ने-सुनने वालों से नए रंग-ढंग, नए रूप में मिली। कभी इस पर तसव्वुफ़ का रंग ग़ालिब आया, तो कभी इश्क़-ओ-मुहब्बत के जज़्बात से सरशार नज़र आई।

Baat Se Baat Chale Abhishek Shukla Ke Saath

बात से बात चले: अभिषेक शुक्ला के साथ एक अदबी गुफ़्तगू

विकास शर्मा राज़ : शुरुआत एक रिवायती लेकिन बुनियादी सवाल से करते हैं ।आपकी शा’इरी की शुरुआत कैसे हुई ? अभिषेक शुक्ला: यह सन् 2004 की बात है विकास भाई.. यहाँ लखनऊ में एक डिबेट कंपटीशन हुआ करता था,मैंने भी उसमें हिस्सा लिया और मुझे उसमें पहला ईनाम भी मिला मगर मुश्किल यह थी कि… continue reading

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