Articles By Hussain Ayaz

Kaifi Azmi Blog

कैफ़ी आज़मी: एक सच्चे तरक़्क़ी-पसंद की ज़िंदगी और शायरी का क़िस्सा

कैफ़ी का जन्म आजमगढ़ के एक छोटे से गाँव मजवाँ में 1918 को हुआ था। उनका ख़ानदान पुराने ख़्यालात का जागीरदार ख़ानदान था। जहाँ न शिक्षा थी और न नए ख़्यालात की वो आज़ादी जिसे लेकर कैफ़ी जन्मे थे।

Naseer Turabi

उनके लिए जो नसीर तुराबी को नहीं जानते!

उर्दू शायरी के आशिक़, नसीर तुराबी के इस दुनिया से रुख़्स्त हो जाने का ग़म मना रहे हैं। दो हज़ार बीस के दिए ज़ख़्म अभी ताज़ा ही थे कि नया साल का पहला अशरा एक और दुख-भरी ख़बर पर ख़त्म हुआ। नसीर तुराबी का जाना अच्छी शायरी के सुनने, पढ़ने और गाने वालों के लिए एक बहुत दुख-भरा वाक़िया है।

Momin Khan Momin Blog

#QissaKahani: हकीम मोमिन ख़ाँ मोमिन, जो हमेशा इश्क़ के बीमार रहे

ये उस वक़्त की बात है जब मोमिन की हिक्मत के चर्चे सुन कर लखनऊ की एक नामी-गिरामी तवाइफ़ जिसका नाम उम्मतुल फ़ातिमा था अपने इलाज के लिए मोमिन के पास दिल्ली चली आई थी। तवाइफ़ लखनऊ की थी तो शेर-ओ-अदब का ज़ौक़ भी रखती थी और शेर भी कहती थी। ‘साहिब’ उसका तख़ल्लुस था।लेकिन लोग उसे आम तौर पर ‘साहब जान’ के बजाय ‘साहिब जी’ कहा करते थे।

Sir Syed Ahmad Khan and Mirza Ghalib

सर सय्यद और ग़ालिब के बीच की नाराज़गी, जो किताब से शुरू हुई और बोतल पर ख़त्म हुई

सर सय्यद और ग़ालिब के रिश्ते उस किताब से ख़राब हुए थे जिसे सर सय्यद ने सम्पादित किया था और ग़ालिब ने उस किताब के लिए सर सय्यद की ख़ूब आलोचना की थी। लेकिन इसके बाद एक समय वो आया जब दोनों के बीच की दूरियाँ शराब की एक बोतल पर समाप्त हुईं।

Mir Taqi Mir

‘बेटा इश्क़ करो, इश्क़’ कितना बदला था पिता की इस नसीहत से मीर का जीवन

किशोरावस्था में ही मिल जाने वाले इश्क़ के सबक़ को लेकर मीर उम्र भर जीते रहे। उनकी ज़िंदगी का कोई काम इश्क़ के शोर और वलवले से ख़ाली नहीं था। उन्होंने न सिर्फ़ पिता से ये नसीहतें सुनी थीं बल्कि इश्क़ में शराबोर उनके जीवन का नज़ारा भी किया था।

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