Urdu Bazar Delhi

दिल्ली का उर्दू बाज़ार : किताबों से कबाबों तक का सफ़र

मीर तक़ी मीर ने दिल्ली के गली-कूचों को ‘औराक़-ए-मुसव्वर’ यानी ‘सचित्र पन्नों’ की उपमा दी थी। ये वो ज़माना था जब दिल्ली में साहित्यिक, तहज़ीबी और सांस्कृतिक सर-गर्मियाँ चरम पर थीं और यहाँ हर तरफ़ शे’र-ओ-शायरी का दौर-दौरा था। दिल्ली के कूचा-ओ-बाज़ार अपनी रौनक़ों और अपने सौन्दर्य के ए’तबार से अपना कोई सानी नहीं रखते… continue reading

बात से बात चले!

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़ के साथ एक अदबी गुफ़्तुगू

आग़ाज़ हम आप के ख़ानदानी पस-मंज़र से करेंगे, क्या आप के घर में शा’इरी और अदब का माहौल था, जिस से प्रभावित हो कर आप भी शे’र की तरफ़ माइल हुए। इस के बारे में कुछ हमें बताइए। नहीं ! मेरे परिवार का दूर- दूर तक शा’इरी तो क्या किसी भी क़िस्म की आर्ट से… continue reading

10 बेहतरीन उर्दू किताबें

लॉकडाउन के दौरान उर्दू साहित्य के शीर्ष 10 पुस्तकों को पढ़ें

अच्छी किताब अपने पाठक के लिए ऐसे दोस्त की हैसियत रखती है जो उस को कभी तन्हाई का एहसास नहीं होने देती, यह एक ऐसे हमसफर की तरह है जो अपने साथी को दूर दराज़ के इलाक़ों और शहरों की घर बैठे सैर करा देती है, आजकल हम करोना की वबा के कारण सफ़र नहीं… continue reading

Bichhda Kuch Is Ada Se Ki Rut Hi Badal Gai

Shers which resonate with our sympathies to those we have lost!

The tree of Time, too, withers just like any other tree the only exception being that, the leaves that bid farewell to Its branches are our dearest companions. This withering is a certainty, what is uncertain is that no one knows when and which leaf is going to fall next… in the embrace of Death…. continue reading

Zameen Kha Gai Aasman Kaise Kaise

Zameen Kha Gai Aasman Kaise Kaise

6 famous poets buried in the city of Delhi

Not many cities have risen to the iconic stature as has Delhi. It has also seen its glorious figures forgotten in its prolonged history. Delhi has long been the heart of art, culture and trade. Centuries before reaching the zenith of its glory in the late Mughal period, Delhi made the legendary Amir Khusro call… continue reading

Romance of Urdu in India

Concept and Text: Aftab Husain Speaking about literature in terms of a Hindu-Muslim divide might seem politically incorrect but, at times, it is necessary to have a ‘communal’ perspective only to get a secular picture of the phenomenon Apart from sharing a humanist-progressive worldview in life and literature, Hindi critic Professor Namwar Singh and fiction… continue reading

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