Tag : Nazm

Azad ghazal aur azad nazm kya hoti hai

आज़ाद ग़ज़ल और आज़ाद नज़्म क्या है?

आज़ाद नज़्म में रदीफ़, क़ाफ़िए की कोई पाबन्दी नहीं होती, बावजूद इसके अगर कहीं कोई क़ाफ़िया मिल जाए तो उसे ऐब की नज़र से नहीं बल्कि हुस्न-ए-इज़ाफ़ी की नज़र से देखते हैं। सन 1944 के आस- पास मख़्दूम मोहिन्द्दीन के इलावा किसी भी तरक़्क़ी-पसन्द नज़्म-निगार ने आज़ाद शाएरी शुरूअ नहीं की थी।

Nazm, shayari, urdu poetry

नज़्म क्या होती है?

नज़्म का लुग़वी मआनी ‘पिरोने’ का है. जैसे अक्सर हम यह कहते भी हैं कि फ़लाँ ने फ़लाँ शे’र में फ़लाँ लफ़्ज़ जो नज़्म किया है वह ज़बान के लिहाज़ से दुरुस्त नहीं है.नज़्म (पाबन्द) की तवारीख़ देखें तो मेरे ख़याल से इसकी उम्र ग़ज़ल की उम्र के लगभग बराबर ही होगी। नज़्में बेश्तर तीन… continue reading

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