Articles By Arsh Sultanpuri

Nasir Kazmi Blog

नासिर काज़मी ज़िन्दगी भर अपनी धरती अंबाला को याद करते रहे

नासिर के यहाँ रात बेहद वसीअ है। रात के मुख़्तलिफ़ पहलू उनकी शायरी में मौजूद हैं। कहा जाता है कि वो सारी सारी रात जागते रहते, और जब पौ फटती, परिंदे चहचहाना शुरू करते तब जा कर उनकी आँखों में नींद का कोई निशान नज़र आता।

Blog on Faiz Ahmad Faiz

जब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को इंग्लिश के पर्चे में 150 में से 165 नंबर मिले

थर्ड ईयर के इम्तिहान के बाद जब तालिब-ए-इल्म अपनी अपनी कापियाँ देख रहे थे तो फ़ैज़ की कॉपी पर 165 नंबर दर्ज थे। कोई हैरान हुए बग़ैर नहीं रह सका क्योंकि इम्तिहान सिर्फ़ 150 नंबरों का था।

Majaz Blog

जब शराब पीते हुए एक मैख़ाने में उनकी मौत हो गई

मजाज़ की शाइरी किसी वाहिद मौजू के इर्द गिर्द चक्कर नहीं लगाती, बल्कि एक नौजवान की ज़िंदगी के बेश्तर पहलुओं पर बिखरी हुई है। मजाज़ की शाइरी में रूमान भी है, एक कश्मकश भी है, आह-ओ-ग़म भी है, कहीं उम्मीद है तो कहीं ना-उम्मीदी की इंतिहा नज़र आती है।

उर्दू शाइरी में हमारी लोक-कहानियाँ और तारीख़ किस तरह महफ़ूज़ हो गई?

मसनवी दर-अस्ल अरबी का लफ़्ज़ है जिसके मआनी दो-दो के हैं। हालाँकि मसनवी लफ़्ज़ अरबी का है, लेकिन मसनवी की सिन्फ़ फ़ारसी शोरा की ईजाद मानी जाती है और पहली मारूफ़ मसनवी के 10वीं सदी में फ़ारसी ज़बान में लिखे जाने के सुराग़ मिलते हैं। ईजाद के साथ ही ईरान में मसनवी की सिन्फ़ बेहद मक़बूल हुई और इस सिन्फ़ में बहुत अहम शाइरी भी हुई। मसलन शाहनामा और मौलाना रूमी की मसनवी। शाहनामा दुनिया की उन सबसे तवील नज़्मों में है जिन्हें किसी एक शख़्स ने लिखा है और इसमें तक़रीबन 50,000 शेर हैं।

Devendra Satyarthi

देवेन्द्र सत्यार्थी: वो आदमी जिसने हिन्दोस्तान के गाँव-गाँव जा कर लोकगीत जमा किए

एक बार साहिर लुधियानवी और देवेन्द्र सत्यार्थी लाहौर से लायलपुर जा रहे थे, लेकिन जब वो स्टेशन में दाख़िल हुए तो उन्हें मालूम हुआ कि गाड़ी पूरी तरह भरी हुई है और किसी भी डिब्बे में तिल रखने की भी जगह बाक़ी नहीं है। कुछ लोग ट्रेन की छत पर भी सवार हैं। साहिर ने… continue reading

Twitter Feeds

Facebook Feeds