Articles By Zia Zameer

ज़िया ज़मीर वर्ष 1977 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पैदा हुए। शिक्षा मुरादाबाद में हुई, यहीं टैक्सेशन के लॉयर हैं। इनके वालिद मशहूर शायर ज़मीर दरवेश हैं। ज़िया ज़मीर ने वर्ष 2001 से शायरी शुरू की और इनकी शायरी के दो मजमुए शाया हो चुके हैं। जिन पर बिहार उर्दू एकेडमी, उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी और हम्दो-नात फाउंडेशन ने इनाम दिए हैं। तीसरा मजमुआ शाया होने वाला है। ज़िया ज़मीर ग़ज़ल, नज़्म, नात, कहानी, समीक्षात्मक और आलोनात्मक निबंध लिखते हैं।

Shahryar Blog

ख़्वाब , सूरज , जुनून , रेत, रात जैसे शब्दों को शहरयार ने अलग अंदाज़ में बरता है

शहरयार ने रात को कई रंगों में रंगने की कामयाब कोशिश की है। उन्होंने रात को अक्सर ज़ुल्म से ताबीर किया है। रात का रंग सियाह होता है, जो नेगेटिविटी ज़ाहिर करता है। सूरज, रोशनी और ख़ुशहाली की अलामत है। शहरयार के यहां रात अक्सर ज़ुल्म की इंतिहा दिखाती है।

Jagjit Singh Blog

जगजीत सिंह: जिस ने मिर्ज़ा ग़ालिब को घर घर पहुँचा दिया

जगजीत सिंह का नाम ज़हन में आते ही चेहरे पर आज भी मुस्कुराहट आ जाती है। जगजीत सिंह पिछली सदी की नब्बे वाली दहाई में जवान होती नस्ल के नौस्टेलजिया का एक अहम किरदार है। वो पीढ़ी जिस तरह अपने बचपन में कार्टूनिस्ट प्राण के किरदारों की नई काॅमिक्स की बेतहाशा राह तका करती थी, ठीक उसी शिद्दत से जगजीत सिंह के नई कैसेट्स उस जवान होती पीढ़ी को मुंतज़िर रखते थे।

gandhi ji ki urdu aur urdu ke gandhi ji

गांधी जी की उर्दू और उर्दू के गांधी जी

जहाँ गांधी जी उर्दू से मुहब्बत करते थे और उर्दू में अपनी बातें करते भी थे और अक्सर लिखते भी थे, इसी तरह गांधी जी की शख़्सियत से मुतअस्सिर हो कर उस वक़्त के शायर और अदीब भी उर्दू में अदब तख़्लीक़ कर रहे थे। वो दौर उर्दू और उर्दू में लिखने वालों के लिए सुनहरी दौर इस लिए भी था कि उर्दू किसी मज़हब या क़ौम की ज़ुबान नहीं हुआ करती थी और उर्दू बोलने वालों को, लिखने वालों को इज्ज़त और मोहब्बत की नज़र से देखा जाता था।

उर्दू तलफ़्फ़ुज़, urdu words

उर्दू तलफ़्फ़ुज़ की सुंदरता

तलफ़्फ़ुज़ किसी भी ज़ुबान का रस है जो कान में तो टपकता ही है, इमला की शक्ल में आंख से देखा भी जाता है। देखिये – ‘नाजुकी’ उसके लब की क्या कहिए’ ख़ुदाए-सुख़न ‘मीर’ का यह ला-ज़वाल मिसरा एक बिंदी की ग़ैर-मौजूदगी के सबब आंख में तीर की तरह चुभा और उसे लहू-लहू कर गया।… continue reading

Firaq Gorakhpuri

फ़िराक़ गोरखपुरी होने का मतलब

फ़िराक़ गोरखपुरी पिछली सदी के सबसे जीनियस शायर हैं। फ़िराक़ से पहले जीनियस लफ़्ज़ के मुसतहिक़ ग़ालिब नज़र आते हैं। ग़ालिब और फ़िराक़ में एक बात और कॉमन है। वो है इन दोनों की नस्र। अगर आप इन दोनों की नस्र पढ़ें तो थोड़ी देर को ही सही, आपका ईमान इनकी शायरी से हिल जाएगा… continue reading

Twitter Feeds

Facebook Feeds