Tag : Urdu

“हिंदुस्तान की हर ज़बान को एक गोपीचंद नारंग चाहिए।” कमलेश्वर

प्रोफेसर गोपीचंद नारंग साहब का जाना किसी बड़ी शख़्सियत के जाने से ज़्यादा बड़ा सानिहा इसलिए है कि गोपीचंद नारंग सिर्फ़ बड़ी शख्सियत नहीं थे बल्कि वो जिस तहज़ीब के अलम-बरदार थे वो उनके साथ चली गई है। वो तहज़ीब बहुत तेज़ी से ख़त्म होती जा रही है। वो तहज़ीब सिर्फ उर्दू ज़बान की तहज़ीब नहीं है बल्कि हिंदुस्तान की हर ज़बान की तहज़ीब है।

Naseeruddin Shah interview

لوگ ہندی فلموں سے تنگ آچکے ہیں۔

ان دنوں فلموں میں زبان کو لے کر بہت ہنگامہ ہوتا ہے۔ خاص کر جب سے ساؤتھ سے کچھ سپر ہٹ فلمیں آئی ہیں۔ ساتھ ہی ہندی کے حوالے سے سیاسی بیان کے بعد بھی بڑے لوگوں نے بیانات دیئے، بحثیں ہوئیں۔ اردو ہمیشہ سے ایک ہدف رہی ہے۔ ان تمام باتوں پر جمیل گلریز نے فلم اور تھیٹر کے مشہور اداکار نصیر الدین شاہ سے بات کی۔

Urdu Journalism

उर्दू सहाफ़त की दो सदियाँ

साल 2022 उर्दू सहाफ़त के हवाले से इंतिहाई अहम साल है। इस साल उर्दू ज़बान की सहाफ़त अपनी ‘उम्र के दो सौ साल मुकम्मल कर रही है। 27 मार्च 1822 को कलकत्ता से उर्दू का पहला अख़बार “जाम-ए-जहाँ-नुमा” जारी हुआ था। लिहाज़ा मार्च का महीना उर्दू सहाफ़त की दो सौ साला तक़रीबात का महीना है।

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उर्दू सहाफ़त की कहानी

यूँ तो उर्दू सहाफ़त के आग़ाज़ का सेहरा हफ़्तावार ‘जाम-ए-जहाँ-नुमा’ के सर बाँधा जाता है, जो पंडित हरिहर दत्त ने 1822 में कलकत्ता से शाए’ किया था, लेकिन उस से क़ब्ल उर्दू हल्क़ों में ये बहस भी छिड़ चुकी है कि उर्दू का पहला अख़बार शे’र-ए-मैसूर टीपू सुल्तान ने 1794 में जारी किया था।

Women's Day

महिला-दिवस के अवसर पर रेख़्ता की ख़ास पेशकश

महिलाऍं आज बहुत से क्षेत्र में तरक़्क़ी कर रही हैं | ख़ासकर आज़ादी के बाद से चाहे वह महिला सशक्तिकरण की बात हो तो आज़ादी के बाद सरकारों ,महिला संगठनों और महिला आयोगों के प्रयासों से महिलाओं के लिए विकास के कई द्वार खुले उनमें शिक्षा का प्रचार जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई | आज वे सियासत, समाजसुधार, ता’लीम, सहाफ़त, अदब, उद्योग, विज्ञान, ब्यूरोक्रेसी, सेना, डॉक्टरी आदि विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के साथ बराबरी पर खड़ी हैं |

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