Tag : Urdu

Yogesh Praveen

शान ए लखनऊ, जान ए लखनऊ

योगेश प्रवीन के इल्म से मुतास्सिर हो कर उन से सिर्फ़ अवाम ही नहीं बॉलीवुड के लोग भी सलाह लेने आया करते थे, बीच सत्तर के दशक में शशि कपूर और श्याम बेनेगल अपनी फ़िल्म जुनून के लिए योगेश जी से मशविरा करने आये थे। ये उस वक़्त की बात है जब शशि कपूर सुपर स्टार हुआ करते थे और श्याम बेनेगल बेहतरीन डायरेक्टर के रूप में जाने जाते थे।

Shahid Ali Khan

محبت کا جلی عنوان شاہد علی خان

شاہد صاحب کی ایک خوبی یہ ہے کہ وہ دُھن کے پکے ہیں جو ٹھان لیتے ہیں وہ کرگزرتے ہیں۔ انجام کی پرواہ نہیں کرتے، چنانچہ جیسے ہی مکتبہ جامعہ سے رشتہ ٹوٹا تو انہوں نے فوراً نئی کتاب کی داغ بیل ڈال دی۔ ابوالفضل انکلیو کے ٹھوکر نمبر 3 میں انہوں نے اپنا اشاعتی ادارہ قائم کیا۔ وہاں وہ اکثر اکیلے بیٹھے رہتے تھے۔ دیگر بیٹھنے والوں میں پروفیسر توقیر احمد خاں کے علاوہ خاکسار تھا۔ بعد میں تعداد بڑھتی گئی، کرسیاں کم پڑنے لگیں۔

Hai Munir teri nigaah mein koyi baat gehrey malaal ki

Hai Munir Teri Nigaah Mein Koi Baat Gehre Malaal Ki

Niyazi may be read as a poet of memories and reveries, fictions and fancies who drew upon them as his basic material. He was a poet of soft notes, audible whispers, and intimate expostulations. His disputes and dissents with life and time are firm, his diction is polite, and his tones of voice echo in hearts rather than heads.

इन दास्तानों में हमें हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत मिलती है

नस्र के लिहाज़ से उर्दू अदब की क़दीम-तर सिन्फ़ दास्तान को कहा गया है। उर्दू अदब का नहवी जुज़्व बुनियादी तौर पर नामी महाकावी कहानियों की क़दीम- तर शक्ल तक ही महदूद था जिसे दास्तान कहा जाता था। इन लम्बी कहानियों के पेचीदा प्लॉट तिलिस्म, जादुई और दीगर हैरत-अंगेज़ मख़्लूक़ और वाक़िआत से लबरेज़ होते थे।

रंगों के उर्दू नाम जो हम भूलते जा रहे हैं

अफ़सोस हमें एहसास नहीं कि हमारे हाँ रंगों के क़दीम और ख़ूबसूरत नाम बड़ी तेज़ी से मतरूक हो रहे हैं। कल उन्हें कौन पहचानेगा। हमने अपने लफ़्ज़ खज़ाने पर लात मारी सो मारी, अपनी धरती से फूटने वाली धनक पर भी ख़ाक डाल दी।

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