Tag : Urdu

Metaphor in Urdu

रूपक जो शेर को ज़मीन से आसमान तक पहुँचा देते हैं

माशूक़ा के चेहरे या बदन की ख़ूब-सूरती बयान करने लिए चाँद, माह, माह से बना माह-पारा/ मह-पारा, माह-जबीं, गुल, गुल से बना गुल-बदन, गुल- फ़िशाँ, गुलाब, पंखुड़ी वग़ैरा। माशूक़ा के लिए ‘बुत’ लफ़्ज़ इस्तिआरे के तौर पर बे-इन्तेहा राइज है।

Maihar-2

बंदूक़ों की नाल से निकलता संगीत

मैहर बैंडदुनिया में इकलौता… भारतीय शास्त्रीय संगीत का आर्केस्ट्रा। बाबा की अनूठी रचना। इस बार पेश किया राग कोसी कांगड़ा। नरेंद्र का फ्लैश चमका। हर वाद्य से उठती एक अलग धुन- सागर की लहरों की तरह कभी अकेली उठान लिए तो कभी आपस में घुलती-मिलती, कभी तेज प्रवाह के साथ चट्टानों से टकराती तो कभी पल-भर को शांत… ।

Asraar-e-Huruuf: The Story of Be

Asraar-e-Huroof- ‘Be’ Kise Kahte Hain?

‘Be’. Written as (ب) in Urdu Rasm-ul-Khatt, and in (ब) Devanagari, it is the second letter of the Urdu alphabets (Huruf-e-Tahajji), and the twenty-third consonant of the Nagari alphabets (वर्णमाला).

Zabaan ke bhi pair hote hain-02

ज़बानें तो दरिया की तरह होती हैं, जो हर पल नए नए पानियों का जलवा दिखाती हैं

ज़बानें हमारे जैसे इंसानों की तरह नहीं होतीं। उनका आपस में कभी झगड़ा नहीं होता। फ़ारसी उर्दू के पास आती है, तो संस्कृत से अल्फ़ाज़ लेते हुए उर्दू को दे जाती है। उर्दू और हिन्दी के नज़्दीक अंग्रेज़ी आती है, तो वो कुछ अल्फ़ाज़ ले जा कर दुनिया भर में बाँट देती है। ये सिलसिला हज़ारों साल से चलता चला आ रहा है।

Maihar-1

मैहर : जहाँ अतीत मौजूदा वक़्त के साथ-साथ चलता है

मेरे लिए मैहर आना दरअसल मेरे बचपन के नास्टेल्जिया से जुड़ा था। बहुत साल पहले की बात है। तब मैं नौ बरस की उम्र में पिता के साथ उस पहाड़ की पथरीली ऊँची-नीची सीढ़ियाँ चढ़कर मंदिर तक पहुँचा था। माँ पीछे छूट गई थीं। ऊँचाई पर तेज हवा चल रही थी और मेरे कपड़े फड़फड़ा रहे थे। तब पिता के साथ मैंने ऊपर रेलिंग से झाँका था।

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