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इन शायरों ने या तो आत्महत्या की या जल्दी ही इस दुनिया से उठ गए

वाक़ई शाइर बना या बनाया नहीं जा सकता। शाइर या शाइरी को तराशना एक मुख़्तलिफ़ काम है। शाइर होना पैदाइशी हुनर है और ये किसी के हाथ में नहीं। शाइरी की मश्क़ आपके हाथ में है और रियाज़त के हाथ में है, कि वो आप पर असर कब करेगी।

Sahir Ludhianvi and Majaz

साहिर ने मजाज़ से क्या कहा रेलवे स्टेशन पर

साहिर उस वक़्त के बेहद मक़बूल शायर मजाज़ के साथ वर्सोवा में रहते थे। दोनों काम की तलाश में यहाँ-वहाँ जाते। एक रोज़ उन्हें कोई प्रोड्यूसर साहब मिले जो कि मजाज़ के जानने वालों में से थे। आपस में बातचीत हुई तो मजाज़ ने बताया कि हम भी बम्बई में नग़्मे लिखने आएँ हैं। वो प्रोड्यूसर साहब उस वक़्त एक फ़िल्म बना रहे थे। उन्होंने दोनों को अगले दिन अपने ऑफ़िस में बुलाया और नग़्मे की सिचुएशन दी। दोनों ने रात में वो नग़्मा पूरा किया और अगले दिन ऑफ़िस गए।

Sher Unke Geet Hamare

जब शायरों के शेर ज़रा सी तब्दीली के साथ फ़िल्मों में पेश किये गए

उर्दू शायरी में किसी दूसरे शायर के कलाम, शे’र या किसी मिस्रा से मुतअस्सिर हो कर, इसमें कुछ इज़ाफ़ा करके उसको अपना लेने की रिवायत हमेशा रही है जिसे तज़मीन कहते हैं। इसके अलावा तरही मुशायरों में किसी उस्ताद की ग़ज़ल से कोई मिस्रा दिया जाता था यानी ‘मिस्रा-ए-तरह’ और सब शायर इसी ज़मीन में इसी क़ाफ़िए और रदीफ़ के साथ ग़ज़लें कहते थे और इस ‘मिस्रा-ए-तरह’ पर अपने मिस्रे से ‘गिरह’ लगाते थे।

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जब शराब पीते हुए एक मैख़ाने में उनकी मौत हो गई

मजाज़ की शाइरी किसी वाहिद मौजू के इर्द गिर्द चक्कर नहीं लगाती, बल्कि एक नौजवान की ज़िंदगी के बेश्तर पहलुओं पर बिखरी हुई है। मजाज़ की शाइरी में रूमान भी है, एक कश्मकश भी है, आह-ओ-ग़म भी है, कहीं उम्मीद है तो कहीं ना-उम्मीदी की इंतिहा नज़र आती है।

Ali Sardar Jafri 'Lucknow ki Panch Raten'

Ali Sardar Jafri’s Life-Scroll : Lucknow ki Panch Raten

Ali Sardar Jafri, the poet of love, peace, and courage, significantly graced the treasure of Urdu literature with his crowning work ‘Lucknow Ki Panch Raten’. A confluence of his travels, friendships, and acquaintance.

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