Tag : Urdu Poetry

Ghazal, Hard and Sur

ग़ज़ल की मक़बूलियत का सफ़र

मौसीक़ी को पसंद करने वाले की तादाद तब ज़ियादा बढ़नी शुरू हुई, जब इसमें ग़ज़लों को दौर शुरू हुआ | ग़ज़ल की सबसे बड़ी ख़ासियत आहंग और अरूज़ ने गुलूकारों को वो आसानी बख्शी कि कोई भी उस्ताद गुलूकार ग़ज़ल गाए बग़ैर नहीं रह सका |

Parveen Shakir

परवीन शाकिर ने अपने अंदर की लड़की को मरने नहीं दिया

परवीन शाकिर अगर आज हयात होतीं तो अड़सठ (68) साल की होतीं, लेकिन न जाने ख़ुदा की क्या हिक्मत या मस्लिहत है कि वो हमसे उन लोगों को बहुत जल्दी छीन लेता है जो हमें बहुत महबूब होते हैं। ऐसे शाइरों, अदीबों और फ़नकारों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है जो बहुत जल्दी हमें छोड़ गए। परवीन शाकिर भी बद-क़िस्मती से इसी फ़ेहरिस्त का हिस्सा हैं।

Akbar Allahabadi

Akbar Allahabadi in a New Avatar!

In Akbar Allahabadi, Urdu language found a humorist, a satirist, a commentator, and a reformer. Unlike many, his satire is not corrosive, or black in nature. He lived during the British Raj and his poetry provides glimpses into the socio-political conditions of that age.

Akhtar-ul-Iman Nazm

Akhtar-ul-Iman: My state of mind while writing ‘Naqsh-e-Paa’

Akhtar ul Iman was one of the most important Urdu poets of his time. Considered as one of the pillars of modern Urdu Nazms (Poems). Akhtar also wrote dialogues for more than hundred bollywood films including ‘Waqt’ and ‘Qaanoon’.

Shakeb Jalali Blog

ज़िन्दगी के ज़ख़्मों से लहू-लुहान शायर : शकेब जलाली

शकेब जलाली की शायरी का उस्लूब मुनफ़रिद और मुमताज़ है और उनकी ग़ज़ल में क़ुदरत रात-दिन, जंगल-सेहरा, बहार-ख़िज़ाँ, अपने हर रूप में जलवा-नुमा है। उनकी शाइरी में ख़िज़ाँ-रसीदा शजर, चाँद, दरिया के इस्तिआरे क़सरत से इस्तेमाल हुए हैं।

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