Tag : Urdu Poetry

Ahmad Faraz Blog

فراز صاحب، ایک یاد

یہ دیارِ ادب میں خوش نصیبی کی اعلا مثال ہے کہ فراز صاحب پشاور میں پلے بڑھے،ادبی اٹھان کی خوش بختی ملی۔۔۔ مجھے بھی اس شہرِ ہفت زبان میں جنم لینے، ابتدائی تعلیم حاصل کرنے اور ان گلیوں میں سانس لینے کے موسم ملے ۔۔۔ آج بھی پشاور کے قہوہ خانوں، ادبی حجروں اور شہر کی قدیم گلیوں میں فراز صاحب کے نقشِ قدم اور ان کے شہرِ ذات کی خوشبو محسوس ہوتی ہے ۔

Naseer Turabi

उनके लिए जो नसीर तुराबी को नहीं जानते!

उर्दू शायरी के आशिक़, नसीर तुराबी के इस दुनिया से रुख़्स्त हो जाने का ग़म मना रहे हैं। दो हज़ार बीस के दिए ज़ख़्म अभी ताज़ा ही थे कि नया साल का पहला अशरा एक और दुख-भरी ख़बर पर ख़त्म हुआ। नसीर तुराबी का जाना अच्छी शायरी के सुनने, पढ़ने और गाने वालों के लिए एक बहुत दुख-भरा वाक़िया है।

Baat-Se-Baat-Chale

बात से बात चले, बकुल देव के साथ एक गुफ़्तगू!

इस सिलसिले के चलते अपने हमअस्रों को और क़रीब से जानने-समझने के मवाक़े तो मयस्सर आएंगे ही, साथ ही साथ गुफ़्तगू के दौरान उर्दू अदब और अदीबों के तख़्लीकी तर्ज़ो तरीक़ के नये पहलू भी सामने निकल कर आएंगे..

मीर तक़ी मीर: चलो टुक मीर को सुनने कि मोती से पिरोता है

मीर के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि उन्होंने सह्ल ज़बान या सरल भाषा में शाइरी की है। ऐसी ज़बान जिसे समझने में किसी को कोई परेशानी न हो और ये बात अक्सर ग़ालिब से उनका मवाज़ना/तुलना करते हुए कही जाती है। लेकिन क्या वाक़ई मीर की शाइरी आसान/आसानी से समझ में आ जाने वाली शाइरी है?

Ghalib Kaun Hai

जब मीर ने ग़ालिब के बारे में एक अजीब बात कही

ग़ालिब कौन है, अब हम उससे क्या बताएँ कि जो ग़ालिब ही से पूछ रहा हो कि ग़ालिब कौन है। बहुत ग़ौर करें तो इसी शे’र में ग़ालिब निराश हो कर ये कहते हुए भी नज़र आते हैं कि- ”वो हमसे पूछ रहे हैं कि ग़ालिब कौन है तो कोई हमीं को बतलाओ कि हम क्या बतलाएँ कि हम कौन हैं।

Twitter Feeds

Facebook Feeds