Tag : Urdu Poets

Jigar Moradabadi

मेरा पैग़ाम मुहब्बत है…

जिगर साहिब रिवायती ग़ज़ल के आख़िरी बड़े शायर हैं। लेकिन उनकी शायरी के आख़िरी दौर में कहीं-कहीं आधुनिकता के हल्के-हल्के रंग भी नज़र आने लगे थे। अगर जिगर साहिब को दस बरस की ज़िन्दगी और शायरी अता हो जाती तो मुमकिन है कि जिगर साहब जदीद शायरी की बुनियाद रखने वाले शायरों में भी गिने जाते।

Javed Akhtar Blog

सफ़िया अख़्तर का जादू जो बाक़ी दुनिया के लिए जावेद अख़्तर है

जावेद अख़्तर साहब अदब की दुनिया का वो रौशन सितारा हैं जो कि बे-हद लम्बे समय से अपनी चमक बिखेर रहा है और वक़्त के साथ साथ जिस की रौशनी दोबाला हो रही है। दुनिया का शायद ही कोई शख़्स होगा जिस तक जावेद अख़्तर साहब के कलाम का जादू न पहुंचा हो।

Ahmad Faraz Blog

فراز صاحب، ایک یاد

یہ دیارِ ادب میں خوش نصیبی کی اعلا مثال ہے کہ فراز صاحب پشاور میں پلے بڑھے،ادبی اٹھان کی خوش بختی ملی۔۔۔ مجھے بھی اس شہرِ ہفت زبان میں جنم لینے، ابتدائی تعلیم حاصل کرنے اور ان گلیوں میں سانس لینے کے موسم ملے ۔۔۔ آج بھی پشاور کے قہوہ خانوں، ادبی حجروں اور شہر کی قدیم گلیوں میں فراز صاحب کے نقشِ قدم اور ان کے شہرِ ذات کی خوشبو محسوس ہوتی ہے ۔

Rahat Indori

तमाम शह्र में मौज़ू ए गुफ़्तगू हम थे

राहत इंदौरी ने मुशाइरे को एक क़िस्म के परफ़ार्मेंस में बदल दिया.. और मुशाइरे के मंच को भी राहत इंदौरी से बड़ा परफ़ार्मर अब शायद ही नसीब हो। वे ऐसा जादू जगाते थे जिसको दोहराना किसी के भी लिये मुमकिन न था।

اردو شاعر مطلب، مرزا غالب

میں نے اپنے ایک اُردو داں اور نکتہ سنج دوست سے پوچھا کہ غالب کون ہے؟ ان کا جواب تھا: ’سوال بظاہر سادہ، لیکن بہت گہرا ہے۔ سادہ اس لیے کہ لوگ اس پر ہنسیں گے کہ آپ کو یہ بھی نہیں معلوم کہ غالب کون ہے اور گہرا اس لیے کہ یہ تو غالب کو بھی نہیں معلوم تھا کہ غالب کون ہے؟

Twitter Feeds

Facebook Feeds