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Fahmeeda Riyaz

फ़हमीदा रियाज़: जिनके शब्द ‘सभ्य समाज’ को तीर की तरह चुभते थे

फ़हमीदा रियाज़ का शुमार उर्दू की उन गिनी-चुनी महिला कवियों में किया जाता है जो ज़िंदगी-भर अपनी शायरी को हथियार बना कर समाज की दक़यानूसी सोच और औरत के बारे में उसके ज़ालिमाना रवैय्ये के ख़िलाफ़ लड़ती रहीं। 1967 में अपने पहले काव्य संग्रह ‘पत्थर की ज़बान’ की इशाअत से लेकर 2018 में हुए अपने… continue reading

Urdu Shayari mein amrad parasti ke rang

اردو شاعری میں امرد پرستی کے رنگ

امرد پرستی کے لغوی معنی خواہ کچھ بھی ہوں، اردو شاعری کی روایت میں یہ اصطلاح مختلف معنی میں رائج ہے۔ جیسا کہ عام طور پہ ہم امرد پرستی سے ایک خاص جنسی معنی مراد لیتے ہیں۔ اس کی حیثیت شاعری کی کائنات میں بڑی حد تک ثانوی ہے، اس کا انکار نہیں کیا جا… continue reading

Urdu Mein Gesu-e Ghanshyam Ke Kham

उर्दू में गेसू-ए-घनश्याम के ख़म

पंडित दयाशंकर नसीम की ‘गुलज़ार-ए-नसीम’ में एक दिलचस्प बात पता चली और ऐसा लगा जैसे कोई पहेली खुली हो, तो वो पहेली ये थी कि गुलज़ार-ए-नसीम में एक शे’र है, साद आँखों के देख कर पिसर कीबीनाई के चेहरे पर नज़र की यहाँ साद से क्या मुराद है ये समझ नहीं आ रहा था, अपने… continue reading

Baat Se Baat Chale Abhishek Shukla Ke Saath

बात से बात चले: अभिषेक शुक्ला के साथ एक अदबी गुफ़्तगू

विकास शर्मा राज़ : शुरुआत एक रिवायती लेकिन बुनियादी सवाल से करते हैं ।आपकी शा’इरी की शुरुआत कैसे हुई ? अभिषेक शुक्ला: यह सन् 2004 की बात है विकास भाई.. यहाँ लखनऊ में एक डिबेट कंपटीशन हुआ करता था,मैंने भी उसमें हिस्सा लिया और मुझे उसमें पहला ईनाम भी मिला मगर मुश्किल यह थी कि… continue reading

Rishton Ki Ahmiyat, Rishton Ki Majbooriyan

रिश्तों की मजबूरियाँ और शायर का दर्द

आदमी के पैदा होते ही उसके साथ तमाम तरह के रिश्ते जुड़ जाते हैं | जब होश संभलता है तो पता लगता है कि आख़िर ये रिश्ते क्या हैं और इनकी हमारी ज़िन्दगी में अहमियत क्या है ! इसके बाद कुछ रिश्ते बेहद ज़रूरी लगने लगते हैं और कुछ एकदम बेमानी | फिर ज़िन्दगी के… continue reading

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