Tag : Jaun Elia

Mushaira and poets

क्या रहा है मुशायरे में अब

शायरी और अदब के चाहने वाले कभी भी एक ही शायर या अदीब को लेकर नहीं बैठते, ये तो मुमकिन है कि कोई एक अदीब उन्हें ज़ियादा पसंद हो, मगर ऐसा नहीं होता कि वो किसी और को न पढ़ें, मीर के आशिक़ ग़ालिब के भी दीवाने हो सकते हैं, जौन को चाहने वाले फ़ैज़ की नज़्में भी गुनगुनाते हुए मिल जाते हैं।

Husn e Jaana Ki Tareef

इन शेरों की तो पेंटिंग्स भी नहीं बनाई जा सकती

महबूब की तारीफ़ करनी हो या मोहब्बत का इज़हार, सबकी पहली पसंद शायरी है, सबकी ज़िन्दगी में एक दौर ऎसा ज़रूर आता है जब ख़ूब शायरी पढ़ी जाती है और लिखने की कोशिशें भी होती हैं, ये दौर अक्सर मोहब्बत या आज की ज़बान में क्रश या पहले पहले प्यार का दौर होता है।

Zer O Zabar

ज़ेर-ओ-ज़बर ने इश्क़ ही ज़ेर-ओ-ज़बर किया

उर्दू सीखने/ पढ़ने वालों के लिये कभी कभी बड़ा मसअला हो जाता है उर्दू में ऐराब का ज़ाहिर न होना। यानी जैसे हिन्दी में छोटी ‘इ’ की मात्रा या छोटे ‘उ’ की मात्रा होती है, उर्दू में उसके लिये ”ज़बर, ज़ेर, पेश” होते हैं, लेकिन वो लिखते वक़्त ज़ाहिर नहीं किये जाते।

Urdu Shayari Mein Shahron Ki Kahani

उर्दू शायरी में शहरों की कहानी

वैसे तो हर शख़्स को अपनी जा-ए-पैदाइश या वतन से मुहब्ब्बत होती ही है और वक़्तन फ़-वक़तन वो उसकी ज़ुबान से ज़ाहिर हो ही जाती है, लेकिन जब मुहब्बत करने वाला शख़्स शेरो अदब से ताल्लुक़ रखता हो तब क्या ही कहने। अलग़रज़ जहाँ जहाँ उर्दू पनपी और परवान चढ़ी उन अक्सर जगहों का नाम… continue reading

Jitne Muh Utni Baatein

जितने मुँह उतनी बातें

“लम्बा चौड़ा आदमी था, शेव बढ़ी हुई थी” “यार शेव कब बनवाओगे? बहुत बढ़ रही है” यह दोनों जुमले टेक्निकली ग़लत हैं, शेव अंग्रेज़ी का लफ़्ज़ है जिसके मानी हैं ‘बाल या दाढ़ी मुंडवावाना’, लेकिन ऊपर के दोनों जुमलों में इसको दाढ़ी के मानी में इस्तिमाल किया है, यानी एकदम उलट मतलब लिया है। तो… continue reading

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