Tag : Poet

Ahmad Faraz - Silsile tod gaya woh sabhi jaate jaate

जब रिटायर्ड जनरल बोले ‘फ़राज़ तुम बाज़ नहीं आते, मैं तुम्हें देख लूँगा’

फ़राज़ रिहाई के बाद ऑफ़िस में बैठे थे कि फ़ोन की घंटी बजने लगी। उधर से आवाज़ आई, “वज़ीर-ए-आज़म आपसे बात करना चाहते हैं। भुट्टो फ़ोन पर आते ही बोले, ”फ़राज़ दिस इज़ मी, दिस टाइम आई सेवड योर लाईफ़। दे वांट टू ट्राई यू।”

बात से बात चले!

आग़ाज़ हम आप के ख़ानदानी पस-मंज़र से करेंगे, क्या आप के घर में शा’इरी और अदब का माहौल था, जिस से प्रभावित हो कर आप भी शे’र की तरफ़ माइल हुए। इस के बारे में कुछ हमें बताइए। नहीं ! मेरे परिवार का दूर- दूर तक शा’इरी तो क्या किसी भी क़िस्म की आर्ट से… continue reading

Romance of Urdu in India

Concept and Text: Aftab Husain Speaking about literature in terms of a Hindu-Muslim divide might seem politically incorrect but, at times, it is necessary to have a ‘communal’ perspective only to get a secular picture of the phenomenon Apart from sharing a humanist-progressive worldview in life and literature, Hindi critic Professor Namwar Singh and fiction… continue reading

wali-uzlat, poetry, profile

हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे___क़ाएम चाँदपुरी

मोहम्मद क़यामुद्दीन ‘क़ाएम’ चाँदपुरी अठारहवीं सदी के मुम्ताज़ शाइ’रों में शामिल हैं। ‘क़ाएम’ चाँदपुरी की पैदाइश तक़रीबन 1725 में क़स्बा चाँदपुर, ज़िला बिजनौर के क़रीब ‘महदूद’ नाम के एक गाँव में हुई थी। लेकिन वो बचपन से दिल्ली में आ रहे और 1755 तक शाही मुलाज़मत के सिलसिले से दिल्ली में ही रहे। दिल्ली की… continue reading

poetry, shatari, sher, urdu, blog

شعر کہانی

بات ہے جمنا کے کنارے بسی ہوئی اس دلیّ کی جس کی آغوش میں ابھی مرزا اسداللہ خاں غالب کی سانسیں لہر لے رہی ہیں غالب نفس کوچے شعر و سخن کی فضا میں اپنے پیچ و خم طے کر رہے ہیں پر کشش ہویلیوں کے دریچوں پر ٹھہری ہوئی ہوائیں شمعِ محفل کو داد… continue reading

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