Blog on Gandhi

گاندھی جی ریختہ میں۔۔۔۔

گاندھی جی کا یہ کہنا کہ اہنسا میرے لئے ایک پالیسی نہیں بلکہ میرا عقیدہ اور میرا مذہب ہے، عظمت انسانی کے خیال کو مزید تقویت دیتا ہے، کیونکہ عدم تشدد سے پیدا ہونے والی طاقت انسان کے ایجاد کردہ تمام ہتھیاروں سے بدرجہا بہتر ہے۔

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राहत इंदौरी: ये सानेहा तो किसी दिन गुज़रने वाला था

राहत की चुभती हुई शायरी, शेर सुनाने के ड्रामाई अंदाज़ और मौके़-मौके़ पर उनकी तरफ़ से फेंके जाने वाले लतीफ़ों और जुमलेबाज़ी ने उन्हें एक दूसरे ही जहान का शायर बना दिया था। वो माईक पर आते ही मुशायरे की ख़ामोशी को दाद-ओ-तहसीन की गर्मी से ऐसा पिघलाते थे कि देर तक मुशायरा अपने मामूल पर नहीं रह पाता था।

Poems or Paintings? Select Designs Carved out of Words

Some of the finest exemplars of intriguing imageries of rain and aftermath are contained in our beloved Urdu poetry. Poets, classical and contemporary alike, have colored their couplets with words, masterfully. From Mirza Ghalib, painting the most abstract impressions, to Ahmad Mushtaq, brushing the simplest of everyday stills, this little collection offers some of the most inviting images drawn, with alphabets!

Sangeet-Ki-Kala

संगीत की कला: गुण और दोष

संगीत मूल रूप से ध्वनि की कला है। संगीत में ध्वनि की अवधारणा बहुत पुरानी है। आवाज़ यंत्रों की ईजाद से बहुत पहले से मौजूद थी। और आवाज़ ही को नज़ीर बना कर संगीत के साज़ ईजाद हुए हैं। हिन्दोस्तान को राग-रागनियों का मुल्क कहा जाता है। संगीत हिन्दुस्तानी सभ्यता का एक मूल तत्व है। हिन्दुस्तानी संगीत को अपनी कुछ विशेषताओं के आधार पर हिन्दुस्तानी पहचान के तौर पर माना जाता है।

Nuqta

उर्दू शब्दों पर नुक़ता क्यों ज़रूरी है

जिन दिनों हिन्दी-उर्दू विवाद ज़ोरों पर था और अदालतों की भाषा उर्दू हो गई, अख़बारात भी उर्दू में ही शाए’ होते तो एक बड़ी ता’दाद में लोग जिन्हें उर्दू की रस्म-उल-ख़त सीखने में दिक़्क़त हो रही थी, उनके लिए राजा शिवप्रसाद सितारे ‘हिन्द’ ने कोशिश की कि ज़बान उर्दू ही रहे और वो नागरी लिपि में लिखी जाए। उन्होंने कहा फ़ारसी की सभी ध्वनियाँ देवनागरी में व्यक्त होनी चाहिए। जब उन्हें पता चला कि फ़ारसी की पाँच ध्वनियाँ (क़, ख़, ग़, ज़, फ़) नागरी में नहीं हैं तो उन्होंने अक्षर के नीचे नुक़्ता लगाने का सुझाव दिया।

Ibn-e-Safi

اردو کا اگاتھا کرسٹی ۔ابنِ صفی(1980-1928)

ابنِ صفی میری معلومات کی حد تک وہ واحد ادیب ہیں جنکا یومِ پیدائش اور یومِ وفات ایک ہی ہے،یعنی 26جولائی ،اس طرح ہم کم سے کم دو برسیاں منانے سے بچ گئے۰انکی زندگی کے ہر گوشے پر اتنا کچھ لکھا جا چکا ہے کہ مجھ سے کم علم کو خامہ فرسائی کرنے کی ضرورت نہیں ہے،لیکن چونکہ ،بچپن میں اولین نقوش انہیں کی تحریروں سے ذہن پر ثبت ہوئے ہیں،

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