Urdu Bazar Delhi

दिल्ली का उर्दू बाज़ार : किताबों से कबाबों तक का सफ़र

मीर तक़ी मीर ने दिल्ली के गली-कूचों को ‘औराक़-ए-मुसव्वर’ यानी ‘सचित्र पन्नों’ की उपमा दी थी। ये वो ज़माना था जब दिल्ली में साहित्यिक, तहज़ीबी और सांस्कृतिक सर-गर्मियाँ चरम पर थीं और यहाँ हर तरफ़ शे’र-ओ-शायरी का दौर-दौरा था। दिल्ली के कूचा-ओ-बाज़ार अपनी रौनक़ों और अपने सौन्दर्य के ए’तबार से अपना कोई सानी नहीं रखते… continue reading

Rishton Ki Ahmiyat, Rishton Ki Majbooriyan

रिश्तों की मजबूरियाँ और शायर का दर्द

आदमी के पैदा होते ही उसके साथ तमाम तरह के रिश्ते जुड़ जाते हैं | जब होश संभलता है तो पता लगता है कि आख़िर ये रिश्ते क्या हैं और इनकी हमारी ज़िन्दगी में अहमियत क्या है ! इसके बाद कुछ रिश्ते बेहद ज़रूरी लगने लगते हैं और कुछ एकदम बेमानी | फिर ज़िन्दगी के… continue reading

Jitne Muh Utni Baatein

जितने मुँह उतनी बातें

“लम्बा चौड़ा आदमी था, शेव बढ़ी हुई थी” “यार शेव कब बनवाओगे? बहुत बढ़ रही है” यह दोनों जुमले टेक्निकली ग़लत हैं, शेव अंग्रेज़ी का लफ़्ज़ है जिसके मानी हैं ‘बाल या दाढ़ी मुंडवावाना’, लेकिन ऊपर के दोनों जुमलों में इसको दाढ़ी के मानी में इस्तिमाल किया है, यानी एकदम उलट मतलब लिया है। तो… continue reading

Depression Shayari, Shayari in Depression, Shayari to Help Fight Depression

डिप्रेशन में शायरी कैसे काम आती है

शायर कैफ़ भोपाली साहब फ़रमाते हैं – ज़िन्दगी शायद इसी का नाम है,दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाईयाँ ज़िन्दगी हमारे सामने कई रूप और कई रंगों के साथ मौजूद है | आज कुछ ऐसे हालात बनते जा रहे हैं कि कहीं भी कोई उम्मीद की रौशनी नज़र नहीं आती | मुस्तक़बिल किसी ज़र्द दरीचे के उस पार का… continue reading

Gulzar Dehlvi Rekhta Blog Urdu

گلزار دہلوی:تہذیبی امتزاج کی تجسیم

پپنڈت آنند موہن زتشی گلزار دہلوی اپنا جسمانی سفر تمام کرکے ہماری ادبی اور تہذیبی تاریخ میں ایک ایسی داستان کے طور پر درج ہوگئے ہیں، جسے جب بھی پڑھا یا سنا جائے گا تو آنکھوں سے اوجھل ہوتی ہوئی ہماری مشترکہ تہذیب کا تمام تر حسن و جمال مجسم ہوکر سامنے آجائے گا۔گلزار صاحب… continue reading

कृष्ण चंद्र के पढ़े लिखे गधे

हर ज़माने में गधों की अज़मत का तरह तरह से एतराफ़ किया गया, कभी ये पैग़म्बरों की सवारी बने, कभी इन्सानों का बोझ उठाया, किसी पार्टी के इंतिख़ाबी निशान के तौर पर पहचाना गया, कभी सियासी जलसों में डिस्कस हुए, हमारे यहां गधा महज़ बोझ उठाने वाला जानवर ही नहीं एक काबिल-ऐ-क़दर जंगी हीरो भी… continue reading

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