Indian Independence Blog

From 1857 to 1947: Towards Our Independence with Urdu Nazms

A part of India’s exquisite literature that has arguably been the closest to common people is Urdu poetry. So much so, that many of the couplets have become like idioms to us. But besides Ghazals and its Shers, Nazms, too are etched in our collective consciousness.

Yoga Day

یوگ جسمانی صحت کے لئے انمول  تحفہ

یوگ ایک روحانی و جسمانی پریکٹس ہے جو خالص ہندوستان کی پیداوار ہے۔ یہ تصوف کی ایک خاص اصطلاح مراقبہ کے ‌مماثل ہے۔ ہندوستان کی قدیم ترین اور کلاسکی زبان سنسکرت میں یوگا کا مطلب ‘نظم و ضبط’ ہے۔ یوگا کی جڑیں ہندو مذہبی روایات میں پیوست ہیں۔ اپنی کئی خصوصیات کی بنا پر آج دنیا بھر میں یوگا کی مقبولیت میں اضافہ ہورہا ہے۔

Shayari Blog

शेर हमारे जीवन से जुड़े रहते हैं

हम जैसों की ये कैसी मजबूरी है कि हम अपनी ख़ुशी या ग़म सिर्फ़ और सिर्फ़ शेरों में ढूंढते है। शायद हमारे पास और कोई तरीक़ा ही नहीं। ये अलग बात की आस-पास, दूर या नज़दीक तक कोई शाइरी वाला है ही नहीं। मगर कुछ शेर ऐसे भी होते है जो आपके सामने वो मंज़र याद दिला देते है जिसे आप बरसों से भूलने की कोशिश में होते है।

“हिंदुस्तान की हर ज़बान को एक गोपीचंद नारंग चाहिए।” कमलेश्वर

प्रोफेसर गोपीचंद नारंग साहब का जाना किसी बड़ी शख़्सियत के जाने से ज़्यादा बड़ा सानिहा इसलिए है कि गोपीचंद नारंग सिर्फ़ बड़ी शख्सियत नहीं थे बल्कि वो जिस तहज़ीब के अलम-बरदार थे वो उनके साथ चली गई है। वो तहज़ीब बहुत तेज़ी से ख़त्म होती जा रही है। वो तहज़ीब सिर्फ उर्दू ज़बान की तहज़ीब नहीं है बल्कि हिंदुस्तान की हर ज़बान की तहज़ीब है।

Ret Samadhi

बुकर के बहाने कुछ सवालों से रू-ब-रू होना भी जरूरी

बीते कई दशकों से हिंदी उपन्यासकार की सारी कोशिश यही होती है कि उसकी रचना को कोई पुरस्कार मिल जाए, जिसमें अमूमन सांठगांठ के किस्से आम होते रहते हैं या फिर किताब किसी तरह से कोर्स में लग जाए। यह सवाल इसलिए अहम हो गया कि जब गीतांजलि श्री को पुरस्कार मिला तो बहुत से हिंदी के रचनाकारों ने ईर्ष्या या अज्ञानतावश यह पूछा कि गीतांजलि श्री कौन हैं?

Naseeruddin Shah interview

لوگ ہندی فلموں سے تنگ آچکے ہیں۔

ان دنوں فلموں میں زبان کو لے کر بہت ہنگامہ ہوتا ہے۔ خاص کر جب سے ساؤتھ سے کچھ سپر ہٹ فلمیں آئی ہیں۔ ساتھ ہی ہندی کے حوالے سے سیاسی بیان کے بعد بھی بڑے لوگوں نے بیانات دیئے، بحثیں ہوئیں۔ اردو ہمیشہ سے ایک ہدف رہی ہے۔ ان تمام باتوں پر جمیل گلریز نے فلم اور تھیٹر کے مشہور اداکار نصیر الدین شاہ سے بات کی۔

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