Baat karna ya baat karni, बात करना या बात करनी

बात करना या बात करनी – दिल्ली और लखनऊ वालों का मसअला

एक दोस्त का सवाल है कि क्या ये जुमला दरुस्त है “मुझे बात बताना है ” या ये सही है “मुझे एक बात बतानी है” ऐसे ही “बात करना” होना चाहिए या “बात करनी” अस्ल में उनके सवाल की वजह उनका ये ख़्याल है कि चूँकि लफ़्ज़ ‘बात’ मोअन्नस (Feminine ) है तो इसके साथ… continue reading

उर्दू तलफ़्फ़ुज़, urdu words

उर्दू तलफ़्फ़ुज़ की सुंदरता

तलफ़्फ़ुज़ किसी भी ज़ुबान का रस है जो कान में तो टपकता ही है, इमला की शक्ल में आंख से देखा भी जाता है। देखिये – ‘नाजुकी’ उसके लब की क्या कहिए’ ख़ुदाए-सुख़न ‘मीर’ का यह ला-ज़वाल मिसरा एक बिंदी की ग़ैर-मौजूदगी के सबब आंख में तीर की तरह चुभा और उसे लहू-लहू कर गया।… continue reading

फ़िक्र नामा, fikr nama, फ़िक्र तोनस्वी, fikr taunsvi

लुग़ात-ए-फ़िक्री: वो अनूठा ‘शब्दकोश’ जो लफ़्ज़ों का कुछ अलग ही अर्थ बताता है

लुग़ात-ए-फ़िक्री, यानी फ़िक्र तोनस्वी का लिखा गया चंद पन्नों का ‘शब्दकोश’ अपने तौर की बहुत दिलचस्प और मज़ेदार तहरीर है। इसमें फ़िक्र ने हमारे दैनिक जीवन में प्रयोग किए जाने वाले शब्दों के अर्थ समाज की कड़वी हक़ीक़तों से बहुत क़रीब जा कर लिखे हैं। यहाँ लीडर का मतलब सिर्फ़ लीडर या राजनेता नहीं बल्कि वह है जो उसके व्यक्तित्व और उसके कारनामों से तय पाता है।

Revisiting the Royal Recitals

Revisiting The Royal Recitals

Shahi Mushairon Ki Ek Tasveer

These Urdu poetic symposia came to be known as Mushairas in the 18th century before which they were called Murekhta or Majlis-e-Rekhta performed in the Rekhta language, an early form of Urdu language, literally meaning ‘scattered’ or ‘mixed’ because it contained Persian in it.

Jigar Moradabadi

जब जिगर कहते, “मेरा ख़ुदा मुझे शराब पिलाता है, आप कौन होते हैं रोकने वाले”

जिगर के साथ वक़्त गुज़ारने वाले बताते हैं कि शराब की बोतल सिर्फ़ उस वक़्त जिगर के हाथ से छूटती जब वह बेहोशी के आलम में होते। नशा उतरता और फिर पीना शुरू कर देते। जिगर ने शराब की क्वालिटी, हद और पीने के वक़्त के बारे में कभी कुछ नहीं सोचा। वह हर वक़्त, हर तरह की शराब ज़्यादा से ज़्यादा पीना चाहते थे।

Hazrat-e-Ishq, हज़रत-ए-इश्क़

हज़रत-ए-इश्क़, जो उस्तादों के उस्ताद हैं

ज़िन्दगी बदलाव का नाम है, जड़ चीज़ों को निष्प्राण कहा जाता है। लेकिन बदलाव कई तरह का होता है, बच्चा पैदा होने के बाद बुज़ुर्ग होने तक बहुत से बदलावों से गुज़रता है, इन बदलावों की दिशा कुछ भी हो सकती है और अगर कोई राह दिखाने वाला न हो तो अक्सर दिशा उल्टी ही… continue reading

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