josh malihabadi shayari

Unique Dimensions of Josh

Josh gave new meaning to life and new life to the meaning. He accorded a new level of consciousness to the art of aesthetics and poetry. He has the capacity of intellect to rationalize and analyze, and the integrity of character to fearlessly question and discard. And some of those questions were cutting too deep and too close to the core of the matter, hence he was punished.

10 साल, 10 शायर

उर्दू के वसीअ दामन में पली-बढ़ी मुख़्लिफ़ असनाफ़-ए-सुख़न में ग़ज़ल के हिस्से में जो मक़बूलियत आई उतनी शोहरत और मक़बूलियत शायरी की किसी सिन्फ़ को न मिल सकी। ग़ज़ल हर दौर में अपने पढ़ने-सुनने वालों से नए रंग-ढंग, नए रूप में मिली। कभी इस पर तसव्वुफ़ का रंग ग़ालिब आया, तो कभी इश्क़-ओ-मुहब्बत के जज़्बात से सरशार नज़र आई।

Parveen Shakir

परवीन शाकिर ने अपने अंदर की लड़की को मरने नहीं दिया

परवीन शाकिर अगर आज हयात होतीं तो उनहत्तर (69) साल की होतीं, लेकिन न जाने ख़ुदा की क्या हिक्मत या मस्लिहत है कि वो हमसे उन लोगों को बहुत जल्दी छीन लेता है जो हमें बहुत महबूब होते हैं। ऐसे शाइरों, अदीबों और फ़नकारों की एक लंबी फ़ेहरिस्त है जो बहुत जल्दी हमें छोड़ गए। परवीन शाकिर भी बद-क़िस्मती से इसी फ़ेहरिस्त का हिस्सा हैं।

Urdu Poetry Blog

How to Read Sounds in Poetry?

Think, what first comes to your mind as you read a couplet? Its idea, image, eloquence, assonance, or something else? Barely are we drawn towards the sounds that envelope the syllables that we’re uttering.

Blog on Faiz Ahmad Faiz

जब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को इंग्लिश के पर्चे में 150 में से 165 नंबर मिले

थर्ड ईयर के इम्तिहान के बाद जब तालिब-ए-इल्म अपनी अपनी कापियाँ देख रहे थे तो फ़ैज़ की कॉपी पर 165 नंबर दर्ज थे। कोई हैरान हुए बग़ैर नहीं रह सका क्योंकि इम्तिहान सिर्फ़ 150 नंबरों का था।

Zauq

कौन जाए ‘ज़ौक़’ पर दिल्ली की गलियाँ छोड़ कर

दिल्ली की गलियों को न छोड़कर जाने वाले इस अज़ीम शायर की दायमी आरामगाह का पता अब चिन्योट बस्ती, मुल्तानी ढाण्डा, पहाड़गंज, नई दिल्ली है जो कि बंटवारे के बाद ग़ैर-तक़सीम पंजाब के चिन्योट और मुल्तान ज़िलों से आकर बसे हिन्दुस्तानियों से आबाद है।

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