Blog on Gandhi

گاندھی جی ریختہ میں۔۔۔۔

گاندھی جی کا یہ کہنا کہ اہنسا میرے لئے ایک پالیسی نہیں بلکہ میرا عقیدہ اور میرا مذہب ہے، عظمت انسانی کے خیال کو مزید تقویت دیتا ہے، کیونکہ عدم تشدد سے پیدا ہونے والی طاقت انسان کے ایجاد کردہ تمام ہتھیاروں سے بدرجہا بہتر ہے۔

क्या हुआ जब एक बार होली और मुहर्रम एक ही महीने में पड़ गए

लखनऊ की होली के क्या कहने साहब! होली क्या है हिन्दुस्तान की कौमी यकजहती की आबरू है। जो ये मानते हैं कि होली सिर्फ़ हिंदुओं का त्योहार है वो होली के दिन पुराने लखनऊ के किसी भी मोहल्ले में जाकर देख लें,पहचानना मुश्किल हो जाएगा रंग में डूबा कौन सा चेहरा हिंदू है कौन सा मुसलमान।

Sir Syed and Ghalib

सर सय्यद और ग़ालिब के बीच की नाराज़गी, जो किताब से शुरू हुई और बोतल पर ख़त्म हुई

सर सय्यद और ग़ालिब के रिश्ते उस किताब से ख़राब हुए थे जिसे सर सय्यद ने सम्पादित किया था और ग़ालिब ने उस किताब के लिए सर सय्यद की ख़ूब आलोचना की थी। लेकिन इसके बाद एक समय वो आया जब दोनों के बीच की दूरियाँ शराब की एक बोतल पर समाप्त हुईं।

Aatish and Nasikh

Aatish and Nasikh: Poets-cum-Pen Fighters

Inside an old house in Saraa-e-Baale Khan, sat a thin, tall man of an unassumed, unconventional temperament on his cheap jute mat under a broken-down roof, sheltered by hay and thatch. Dressed in a simple lungi, he sat in patience and contentment, spending his life like some aloof and carefree dervish. As his tilted cap rakishly fell over one of his eyebrows, he kept staring at an outdated wall ruminating about love, life, and poetry.

Habib Jalib Blog

उन्होंने हमेशा पाकिस्तानी फ़ौजी तानाशाहों का खुले-आम विरोध किया

अवाम के दर्द को जितना क़रीब से उन्होंने देखा उसे महसूस किया और उसके बारे में लिखा ऐसा उस दौर में बहुत ही कम शायरों ने किया। लोगों ने उन्हें शायर-ए-अवाम का दर्जा भी दिया। वो उस वक़्त के सबसे ज़ियादा पढ़े जाने वाले और मक़बूल शायरों की फ़ेहरिस्त में सबसे आगे थे। हबीब जालिब साहब ने पाकिस्तान में हमेशा मार्शल लॉ की मुख़ालिफ़त की क्योंकि वो जानते थे कि इस ‘लॉ’ में किस तरह से एक आम इंसान के हुक़ूक़ तलफ़ किए जाते हैं। इस सिलसिले में उन्हें पुलिस की लाठियाँ भी खानी पड़ी और जेल भी जाना पड़ा।

इन दास्तानों में हमें हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत मिलती है

नस्र के लिहाज़ से उर्दू अदब की क़दीम-तर सिन्फ़ दास्तान को कहा गया है। उर्दू अदब का नहवी जुज़्व बुनियादी तौर पर नामी महाकावी कहानियों की क़दीम- तर शक्ल तक ही महदूद था जिसे दास्तान कहा जाता था। इन लम्बी कहानियों के पेचीदा प्लॉट तिलिस्म, जादुई और दीगर हैरत-अंगेज़ मख़्लूक़ और वाक़िआत से लबरेज़ होते थे।

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