जो कृष्ण भक्त थे और मौलवी भी थे, और कामरेड भी

हसरत शायर तो थे ही ,संविधान सभा के सदस्य भी थे, जो यूनाइटेड प्रोविंस से चुने गए थे ,इस्लामी विद्वान,फ़लसफ़ी और कृष्ण-भक्त इनके बारे में कहा जाता है। हसरत जब भी हज की यात्रा करके लौटते थे तो सीधे मथुरा वृंदावन जाया करते थे। वो कहते थे जब तक मैं मथुरा न जाऊॅं मेरा हज किस काम का है उनके बारे में मशहूर है कि उन्होंने तेरह हज किए थे।

Maihar-2

बंदूक़ों की नाल से निकलता संगीत

मैहर बैंडदुनिया में इकलौता… भारतीय शास्त्रीय संगीत का आर्केस्ट्रा। बाबा की अनूठी रचना। इस बार पेश किया राग कोसी कांगड़ा। नरेंद्र का फ्लैश चमका। हर वाद्य से उठती एक अलग धुन- सागर की लहरों की तरह कभी अकेली उठान लिए तो कभी आपस में घुलती-मिलती, कभी तेज प्रवाह के साथ चट्टानों से टकराती तो कभी पल-भर को शांत… ।

Harf aur Alfaaz

ज़बान सीखने के छ मरहले होते हैं

ज़बान की बुनियाद उसकी एल्फ़ाबेट होती है। या’नी सिलसिला-वार पहले हरूफ़ फिर अल्फ़ाज़ फिर ज़बान। लफ़्ज़ को समझने के लिए हुरूफ़ की समझ ज़रूरी है। और ज़बान को समझने के लिए अल्फ़ाज़ और उनके मआनी की समझ।

Asraar-e-Huruuf: The Story of Be

Asraar-e-Huroof- ‘Be’ Kise Kahte Hain?

‘Be’. Written as (ب) in Urdu Rasm-ul-Khatt, and in (ब) Devanagari, it is the second letter of the Urdu alphabets (Huruf-e-Tahajji), and the twenty-third consonant of the Nagari alphabets (वर्णमाला).

Jagjit Singh Blog

जगजीत सिंह: जिस ने मिर्ज़ा ग़ालिब को घर घर पहुँचा दिया

जगजीत सिंह का नाम ज़हन में आते ही चेहरे पर आज भी मुस्कुराहट आ जाती है। जगजीत सिंह पिछली सदी की नब्बे वाली दहाई में जवान होती नस्ल के नौस्टेलजिया का एक अहम किरदार है। वो पीढ़ी जिस तरह अपने बचपन में कार्टूनिस्ट प्राण के किरदारों की नई काॅमिक्स की बेतहाशा राह तका करती थी, ठीक उसी शिद्दत से जगजीत सिंह के नई कैसेट्स उस जवान होती पीढ़ी को मुंतज़िर रखते थे।

Zabaan ke bhi pair hote hain-02

ज़बानें तो दरिया की तरह होती हैं, जो हर पल नए नए पानियों का जलवा दिखाती हैं

ज़बानें हमारे जैसे इंसानों की तरह नहीं होतीं। उनका आपस में कभी झगड़ा नहीं होता। फ़ारसी उर्दू के पास आती है, तो संस्कृत से अल्फ़ाज़ लेते हुए उर्दू को दे जाती है। उर्दू और हिन्दी के नज़्दीक अंग्रेज़ी आती है, तो वो कुछ अल्फ़ाज़ ले जा कर दुनिया भर में बाँट देती है। ये सिलसिला हज़ारों साल से चलता चला आ रहा है।

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