Jurat and Insha

Jurat Aur Insha ka Yaaraana: Interesting Anecdotes

Born in Delhi, in the year 1748, Yahya Aman, better known as the poet Jurat Qalandar Bakhsh was unlike any other poet of his time. Known for an artful portrayal of mischief, mirth and mockery in his poetry, Jurat, was defined as a ‘skirt-chasing poet’ by none other than Mir Taqi Mir.

Blog on War

जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है

आलमे-इंसानियत की कोई भी जंग उठाकर देख लीजिए और उसके असबाब तलाशिए तो आख़िर में वाहिद सबब ताक़त का जुनून ही नज़र आएगा और इसमें अगर अना की दीवानगी भी शामिल कर ली जाए तो मुआमला और ख़तरनाक हो जाता है।

Women's Day

महिला-दिवस के अवसर पर रेख़्ता की ख़ास पेशकश

महिलाऍं आज बहुत से क्षेत्र में तरक़्क़ी कर रही हैं | ख़ासकर आज़ादी के बाद से चाहे वह महिला सशक्तिकरण की बात हो तो आज़ादी के बाद सरकारों ,महिला संगठनों और महिला आयोगों के प्रयासों से महिलाओं के लिए विकास के कई द्वार खुले उनमें शिक्षा का प्रचार जिससे उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई | आज वे सियासत, समाजसुधार, ता’लीम, सहाफ़त, अदब, उद्योग, विज्ञान, ब्यूरोक्रेसी, सेना, डॉक्टरी आदि विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के साथ बराबरी पर खड़ी हैं |

Firaq Gorakhpuri

जब जोश से अनबन हुई और फ़िराक़ गोरखपुरी ने पूरी किताब लिख दी

रूप की रुबाइयाँ एक और ज़ाविए से अहम हैं क्योंकि वो फ़िराक़ साहब की ज़िंदगी के अहम वाक़िए से जुड़ी हुई हैं। फ़िराक़ साहब और जोश साहब में गहरी दोस्ती थी लेकिन एक बार उनमें कुछ ऐसी अनबन हुई कि एक अर्से तक बात नहीं हुई। जब फ़िराक़ साहब दिल्ली से वापस इलाहबाद आए तो उन्होंने एक रुबाई कही थी।

Metaphor in Urdu

रूपक जो शेर को ज़मीन से आसमान तक पहुँचा देते हैं

माशूक़ा के चेहरे या बदन की ख़ूब-सूरती बयान करने लिए चाँद, माह, माह से बना माह-पारा/ मह-पारा, माह-जबीं, गुल, गुल से बना गुल-बदन, गुल- फ़िशाँ, गुलाब, पंखुड़ी वग़ैरा। माशूक़ा के लिए ‘बुत’ लफ़्ज़ इस्तिआरे के तौर पर बे-इन्तेहा राइज है।

एक ऐसा परिवार जो छ पीढ़ियों से साहित्य की ख़िदमत कर रहा है

उर्दू अदब के चंद बेहतरीन और अहम शाइरों की फ़ेहरिस्त में जाँ निसार अख़्तर का नाम भी आता है। अपनी बात को आसान लहजे में कह देने का फ़न उन की शाइरी में भी देखने को मिलता है। वो अपने वक़्त से लेकर अब तक लोगों के पसंदीदा शाइर बने हुए हैं जब कि ऐसा कम शाइरों के साथ होता है। उनकी शाइरी को पसंद करने वाले लोगों में दिन-ब-दिन इज़ाफ़ा हो रहा है।

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