Metaphor in Urdu

रूपक जो शेर को ज़मीन से आसमान तक पहुँचा देते हैं

माशूक़ा के चेहरे या बदन की ख़ूब-सूरती बयान करने लिए चाँद, माह, माह से बना माह-पारा/ मह-पारा, माह-जबीं, गुल, गुल से बना गुल-बदन, गुल- फ़िशाँ, गुलाब, पंखुड़ी वग़ैरा। माशूक़ा के लिए ‘बुत’ लफ़्ज़ इस्तिआरे के तौर पर बे-इन्तेहा राइज है।

झूठी दुनिया का सच्चा अफ़साना-निगार

मंटो की ज़िंदगी उनके अफ़सानों की तरह न सिर्फ़ ये कि दिलचस्प बल्कि संक्षिप्त भी थी। मात्र 42 साल 8 माह और चार दिन की छोटी सी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा मंटो ने अपनी शर्तों पर, निहायत लापरवाई और लाउबालीपन से गुज़ारा। उन्होंने ज़िंदगी को एक बाज़ी की तरह खेला और हार कर भी जीत गए।

Javed Akhtar Blog

सफ़िया अख़्तर का जादू जो बाक़ी दुनिया के लिए जावेद अख़्तर है

जावेद अख़्तर साहब अदब की दुनिया का वो रौशन सितारा हैं जो कि बे-हद लम्बे समय से अपनी चमक बिखेर रहा है और वक़्त के साथ साथ जिस की रौशनी दोबाला हो रही है। दुनिया का शायद ही कोई शख़्स होगा जिस तक जावेद अख़्तर साहब के कलाम का जादू न पहुंचा हो।

Ibn e Insha Blog

इब्न-ए-इंशा और उनका चाँद नगर

चाँद से मुतअल्लिक़ बहुत सारे मुहवारे भी हमारी ज़बान का हिस्सा हैं, मसलन ईद का चाँद होना, चार चाँद लगना वग़ैरह। इसके बावजूद जब मैं चाँद के हवाले से शायरी की बात करता हूँ तो मेरे ज़हन में सिर्फ़ दो नाम नुमायाँ होते हैं – पहला मीर तक़ी मीर और दूसरा इब्न-ए-इंशा।

Kaifi Azmi Blog

कैफ़ी आज़मी: एक सच्चे तरक़्क़ी-पसंद की ज़िंदगी और शायरी का क़िस्सा

कैफ़ी का जन्म आजमगढ़ के एक छोटे से गाँव मजवाँ में 1918 को हुआ था। उनका ख़ानदान पुराने ख़्यालात का जागीरदार ख़ानदान था। जहाँ न शिक्षा थी और न नए ख़्यालात की वो आज़ादी जिसे लेकर कैफ़ी जन्मे थे।

Ahmad Faraz Blog

فراز صاحب، ایک یاد

یہ دیارِ ادب میں خوش نصیبی کی اعلا مثال ہے کہ فراز صاحب پشاور میں پلے بڑھے،ادبی اٹھان کی خوش بختی ملی۔۔۔ مجھے بھی اس شہرِ ہفت زبان میں جنم لینے، ابتدائی تعلیم حاصل کرنے اور ان گلیوں میں سانس لینے کے موسم ملے ۔۔۔ آج بھی پشاور کے قہوہ خانوں، ادبی حجروں اور شہر کی قدیم گلیوں میں فراز صاحب کے نقشِ قدم اور ان کے شہرِ ذات کی خوشبو محسوس ہوتی ہے ۔

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