Baat karna ya baat karni, बात करना या बात करनी

बात करना या बात करनी – दिल्ली और लखनऊ वालों का मसअला

एक दोस्त का सवाल है कि क्या ये जुमला दरुस्त है “मुझे बात बताना है ” या ये सही है “मुझे एक बात बतानी है” ऐसे ही “बात करना” होना चाहिए या “बात करनी” अस्ल में उनके सवाल की वजह उनका ये ख़्याल है कि चूँकि लफ़्ज़ ‘बात’ मोअन्नस (Feminine ) है तो इसके साथ… continue reading

Urdu Mein Gesu-e Ghanshyam Ke Kham

उर्दू में गेसू-ए-घनश्याम के ख़म

पंडित दयाशंकर नसीम की ‘गुलज़ार-ए-नसीम’ में एक दिलचस्प बात पता चली और ऐसा लगा जैसे कोई पहेली खुली हो, तो वो पहेली ये थी कि गुलज़ार-ए-नसीम में एक शे’र है, साद आँखों के देख कर पिसर कीबीनाई के चेहरे पर नज़र की यहाँ साद से क्या मुराद है ये समझ नहीं आ रहा था, अपने… continue reading

Baat Se Baat Chale Abhishek Shukla Ke Saath

बात से बात चले: अभिषेक शुक्ला के साथ एक अदबी गुफ़्तगू

विकास शर्मा राज़ : शुरुआत एक रिवायती लेकिन बुनियादी सवाल से करते हैं ।आपकी शा’इरी की शुरुआत कैसे हुई ? अभिषेक शुक्ला: यह सन् 2004 की बात है विकास भाई.. यहाँ लखनऊ में एक डिबेट कंपटीशन हुआ करता था,मैंने भी उसमें हिस्सा लिया और मुझे उसमें पहला ईनाम भी मिला मगर मुश्किल यह थी कि… continue reading

Urdu Bazar Delhi

दिल्ली का उर्दू बाज़ार : किताबों से कबाबों तक का सफ़र

मीर तक़ी मीर ने दिल्ली के गली-कूचों को ‘औराक़-ए-मुसव्वर’ यानी ‘सचित्र पन्नों’ की उपमा दी थी। ये वो ज़माना था जब दिल्ली में साहित्यिक, तहज़ीबी और सांस्कृतिक सर-गर्मियाँ चरम पर थीं और यहाँ हर तरफ़ शे’र-ओ-शायरी का दौर-दौरा था। दिल्ली के कूचा-ओ-बाज़ार अपनी रौनक़ों और अपने सौन्दर्य के ए’तबार से अपना कोई सानी नहीं रखते… continue reading

Rishton Ki Ahmiyat, Rishton Ki Majbooriyan

रिश्तों की मजबूरियाँ और शायर का दर्द

आदमी के पैदा होते ही उसके साथ तमाम तरह के रिश्ते जुड़ जाते हैं | जब होश संभलता है तो पता लगता है कि आख़िर ये रिश्ते क्या हैं और इनकी हमारी ज़िन्दगी में अहमियत क्या है ! इसके बाद कुछ रिश्ते बेहद ज़रूरी लगने लगते हैं और कुछ एकदम बेमानी | फिर ज़िन्दगी के… continue reading

Jitne Muh Utni Baatein

जितने मुँह उतनी बातें

“लम्बा चौड़ा आदमी था, शेव बढ़ी हुई थी” “यार शेव कब बनवाओगे? बहुत बढ़ रही है” यह दोनों जुमले टेक्निकली ग़लत हैं, शेव अंग्रेज़ी का लफ़्ज़ है जिसके मानी हैं ‘बाल या दाढ़ी मुंडवावाना’, लेकिन ऊपर के दोनों जुमलों में इसको दाढ़ी के मानी में इस्तिमाल किया है, यानी एकदम उलट मतलब लिया है। तो… continue reading

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