Urdu Bazar Delhi

दिल्ली का उर्दू बाज़ार : किताबों से कबाबों तक का सफ़र

मीर तक़ी मीर ने दिल्ली के गली-कूचों को ‘औराक़-ए-मुसव्वर’ यानी ‘सचित्र पन्नों’ की उपमा दी थी। ये वो ज़माना था जब दिल्ली में साहित्यिक, तहज़ीबी और सांस्कृतिक सर-गर्मियाँ चरम पर थीं और यहाँ हर तरफ़ शे’र-ओ-शायरी का दौर-दौरा था। दिल्ली के कूचा-ओ-बाज़ार अपनी रौनक़ों और अपने सौन्दर्य के ए’तबार से अपना कोई सानी नहीं रखते… continue reading

Nazm, shayari, urdu poetry

नज़्म क्या होती है?

लेखक: धीरेन्द्र सिंह फ़ैयाज़ नज़्म का लुग़वी मआनी ‘पिरोने’ का है. जैसे अक्सर हम यह कहते भी हैं कि फ़लाँ ने फ़लाँ शे’र में फ़लाँ लफ़्ज़ जो नज़्म किया है वह ज़बान के लिहाज़ से दुरुस्त नहीं है.नज़्म (पाबन्द) की तवारीख़ देखें तो मेरे ख़याल से इसकी उम्र ग़ज़ल की उम्र के लगभग बराबर ही… continue reading

Corona, shayari, urdu, poetry

कोरोना के बाद कि दुनिया: शायर कि नज़र से

लेखक: ज़िया ज़मीर इक्कीसवीं सदी की तीसरी दहाई शुरू हुआ चाहती है। मौसमे-सर्द रवाना होते-होते वापसी कर रहा है और मौसमे-गर्म की आमद-आमद है। मगर दो मौसमों के मिलन की इस साअत में भी दिल बुझे हुए हैं। दो-चार लोगों के दिल नहीं, दो-चार शहरों या मुल्कों के दिल नहीं बल्कि सारी दुनिया के दिल… continue reading

Urdu jise kehte hain. Language, urdu, culture

उर्दू जिसे कहते हैं

जो ज़बान अपने चारों तरफ देखती है वही ज़बान इनसानी जरूरतों को पूरा भी कर सकती है।

ज़बानें अपना कल्चर रखती हैं और वही ज़बान बड़ी तसव्वुर की जाती है जिस में ख़याल और इज़हार के लिए अल्फ़ाज़ की तंगी न हो, यूँ तो सारी ज़बानों के अपने लफ़्ज़ और अपना शब्द-कोश होता है। और दुनिया के मुखतलिफ़ हिस्सों में बस्ने वाले लोग अपनी ज़बान पर फ़ख्र भी करते हैं, इसी तरह… continue reading

HUM BHI DARIYA HAIN HUMEIN APNA HUNAR MAALUUM HAI

Five prominent Feminist writers in Urdu

Concept and Text: Abbas Qamar In the latter half of twentieth century, the world was hit by a Feminist storm; and rightly so. The female voices rose to break free of the four-walls behind which they had always remained unheard in a strongly patriarchal society. We mention here some names and their works that championed… continue reading

BUSTING FICTION ESTABLISHING FACTS

The Case of Urdu

A brief history of Urdu language exploring the popular myths that label Urdu as a ‘foreign language’, ‘Islamic language’, ‘camp language’ etc. It also offers a rough sample of a broad and universal linguistic pattern through the case history of India.

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