Metaphor in Urdu

रूपक जो शेर को ज़मीन से आसमान तक पहुँचा देते हैं

माशूक़ा के चेहरे या बदन की ख़ूब-सूरती बयान करने लिए चाँद, माह, माह से बना माह-पारा/ मह-पारा, माह-जबीं, गुल, गुल से बना गुल-बदन, गुल- फ़िशाँ, गुलाब, पंखुड़ी वग़ैरा। माशूक़ा के लिए ‘बुत’ लफ़्ज़ इस्तिआरे के तौर पर बे-इन्तेहा राइज है।

Urdu Script, Urdu Lipi

उर्दू लिपि के कुछ बारीक मसअले

किसी भी ज़बान को पूरी तरह से समझने के लिए, उसके एक-एक लफ़्ज़ के मआनी तक पहुँचने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है, कि हमें उस ज़बान की रस्मुल- ख़त या’नी लिपि (script) का इल्म होना चाहिए। जब तक हम कोई ज़बान अच्छी तरह पढ़ और लिख नहीं सकते, हम उस ज़बान से पूरी तरह वाक़िफ़ नहीं हो सकते।

Lal Qila 1960 movie blog

लाल क़िला फ़िल्म आज भी हमें अपने असर में रक्खे हुए है

ख़ूबसूरत मुकालिमों से आरास्ता 1960 में मंज़र-ए-आम पर आयी फ़िल्म “लाल क़िला” सिर्फ़ लाल क़िले और हिन्दोस्तान के आख़िरी ताजदार बहादुर शाह ज़फ़र की कहानी नहीं है, बल्कि उस शरारे की कहानी है जो ज़ुल्म और इस्तेहसाल की हवा पा कर 1857 में एक शोले की शक्ल इख़्तियार कर गया।

Bollywood and Urdu

जब महबूबा को मर्डरर के बजाए क़ातिल कहा जाए

उर्दू की तारीफ़ बयान करने के लिए मेरे पास सिर्फ़ एहसासात ही हैं क्यों कि ये काम लफ़्ज़ों को नहीं दिया जा सकता। मैं यक़ीन से कह सकता हूँ कि अगर उर्दू बॉलीवुड का हिस्सा न होती तो ऐसी फ़िल्में, ग़ज़लें, नग़्में, डायलॉग्स का हमारी ज़िंदगी पर कोई ख़ास असर न होता।

Teen Urdu Shayar

तीन उर्दू शायर और उनकी पंजाबी ग़ज़लें

ग़ज़ल हिन्दोस्तान की दीगर ज़बानों में कही जा रही है, लेकिन पंजाबी ग़ज़ल उर्दू ग़ज़ल के क़रीब-तरीन है। ये क़ुरबत इस दर्जा है कि पंजाबी के मुमताज़ शायरों के फ़ेहरिस्त में जो लोग हैं, उन नामों से उर्दू के क़ारी भी ना-शनास नहीं। हबीब जालिब, ज़फ़र इक़बाल, मुनीर नियाज़ी जैसे मोतबर शायर इसकी चंद मिसालें हैं।

Urdu-Marsiya

Urdu Marsiya: A Historical Overview

The term ‘Marsiya’ (elegy) is derived from Arabic word ‘risa’ which means lamentation of the dead person, weeping and wailing over the deceased. It existed in Iran as a well defined literary form, in pre-Islamic days. ‘Sog-e-Siyahwashan’ (mourning of Siyahwash, father of Kai Cyrus), ‘Marg-i-Zarir’ (the death of Zarir, brother of Gushtasp) and some others are still considered as legacy of ancient Persian literature.

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